Saturday, 4 June 2016

मॉडल स्कूल है सनसिटी वर्ल्ड स्कूल

हाल ही में मैं गुडगाँव के सनसिटी वर्ल्ड स्कूल में गया था | वहां जाने  के लिए मैं पहले से ही बहुत उत्सुक था, क्योंकी सुना था की यह स्कूल बहुत भव्य है और यहाँ के छात्र - छात्राएं होनहार होने के साथ ही बहुत संस्कारी है | यही वजह मुझे जाने पर मजबूर कर दिया | इस स्कूल का पब्लिक रिलेशन , पीआर प्रोफेशनल्स गुरुग्राम देखता है और इसी के सहयोग से मुझे वहां जाने का मौका मिला  |  

उस दिन स्कूल में 'मदर्स डे' मनाने के अलावां ‘IB’ IGCSE बोर्ड का शुभारंभ होना था | मैं स्कूल के अन्दर जैसे ही प्रवेश किया तो देखा की बहुत बड़ा स्कूल है और वहां का वातावरण बिल्कुल शांत है | धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए मैं चारो तरफ देखते जा रहा था | आगे आँखों देखा सुना रहा हूँ  -  स्कूल के प्रत्येक कोने पर एक-एक छात्र खड़े है और आमंत्रित अतिथि को बच्चे बड़े ही श्रद्धा और विनम्र से नमस्कार के साथ उनका स्वागत कर रहे है | यह  बात मुझे बहुत अच्छी लगी जो अन्य स्कूलों में मुझे कम देखने को मिला है |

आगे हॉल में नजारा इससे भी हटकर है यहाँ जो देख रहा हूँ इससे तो मै बिल्कुल ही आश्चर्य चकित हूँ  | मंच पर छोटे बच्चें बहुत ही प्रभावशाली ढंग से एंकरिंग कर रहे है | इनके बोलने की शैली से मै काफी प्रभावित हूँ|

स्कूल की प्रधानाचार्य श्री रूपा चक्रवर्ती का शिक्षक/शिक्षिका एवं बच्चो ने अच्छा साथ निभाते हुए मुख्य अतिथि श्री सिडनी रोज का स्वागत किये तथा मदर्स डे के अवसर पर बच्चों ने मंच पर कविता, नाटक और नृत्य कला की बखूबी प्रस्तुति दी | मंच पर बहुत सारे बच्चों का समूह नृत्य पर नियंत्रण और तबला बजाने की कला तो मानो सोने पर सुहागा कर दिया | बच्चों को भी अभिभावकों का अच्छा साथ मिला जिनका उत्साहवर्धन अभिभावकों ने खड़े होकर तालियाँ बजाकर की | इसी दौरान एक पंक्ति मेरे कानों  में गूंजी  माँ एक और थप्पड़ मारो ना”' | इस पंक्ति ने मुझे अपने बचपन की याद दिला दी जिससे मैं कुछ पल के लिए भावुक हो गया | अंत में कार्यक्रम का समापन बच्चों ने केंडल मार्च के साथ की |

सनसिटी स्कूल में यह सब देखना मेरे लिए अदभुत था, क्योंकी  दूसरी या तीसरी कक्षा के छात्रों में जिस तरह का हुनर मुझे दिखा, उससे मै काफी प्रभावित हुआ | सनसिटी स्कूल देखना बहुत ही शानदार एवं सार्थक रहा| जहाँ मुझे बहुत सी नई चीजें सीखने को मिली, जो मेरे लिए प्रेरणास्रोत है| कहा जाता है की कभी-कभी बड़ो को भी छोटो से बहुत कुछ सीखने को मिलता है | स्कूल के इस पुरे माहौल का श्रेय इस स्कूल की प्रधानाचार्य श्री रूपा चक्रवर्ती को जाता है जिन्होंने इस तरह का आधार बनाया है और उसे और बेहतर बनाने में कार्यरत है |

                       लेखक सदाम हुसेन, -‘पि. आर प्रोफेशनल्स’


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