Friday, 24 June 2016

पैसा कमाना आसान है लेकिन इज्जत कमाना उतना ही कठिन

मुझे अपनी भावनाओं को व्यक्त करना कितना अच्छा लगता है, यह बताने के बजाय मैं उनको लिखना ज्यादा पसंद करता हूँ | यहाँ मैं उस समय की बात कर रहा हूँ जब मैं अपने गाँव से रोजगार की तलाश में राजधानी दिल्ली आया था | रोजगार मिलने में वक्त लगा किन्तु मैं ज़रा भी नहीं घबराया , क्योंकी यह भली-भांति जानता हूँ कि लोगो को आगे बढ़ने में कुछ वक़्त तो लगता ही है | वर्तमान में, मैं एक पीआर फर्म में जॉब करता हूँ और मुझे ऐसा लगता है की यह फर्म दुनिया की सबसे अच्छी कम्पनियों में से एक है | वैसे तो आजकल लोंगों  के पास पैसा कमाने के बहुत से तरीके हो गये है, और आसन भी | लोग कुछ न कुछ करके अपनी दिनचर्या अच्छे से चला रहे हैं लेकिन एक ऐसी चीज जो आज के दैनिक जीवन में किसी खास इन्सान के पास ही होती है,  जिस चीज का कोई मोल नहीं, जिसे लोग अपने कर्म से ही कमाते है और मेरा अपना व्यक्तिगत विचार भी है कि पैसे के अलावा भी बहुत सी चीजे होती है जिन्हें कमाना इतना आसान नहीं होता है और उनमे से एक है इज्जत |

बचपन से ही मैं यही सोचता रहा हूँ की भले जमाना कितना भी क्यों न बदल जाये पर मै अपने आप पर ज़माने के हिसाब से वह नियंत्रण रखूँगा, जिससे मेरे व्यवहार में कोई बदलाव ना आने पाए ,लोंगों का समर्थन/प्यार हमेशा बना रहे , जिससे भी रिश्ता बने उसमे वो गहराई बरकरार रहे | मैं जिस भी कम्पनी में काम करूँ, वह कम्पनी ऐसी हो जिसमें मुझे अपने शैक्षिक हुनर के आधार पर काम करने के अलावां, मेरे पास जो अन्य कला है वह भी मेरे काम में उपयोग हो सके |तथा ईमानदार, स्वालंबी बनने के साथ ही एक अच्छा इन्सान बनने का अवसर  मिले | क्योंकी, मैं दुनिया की नज़र में महान बनूँ या ना बनूँ , पर कम से कम मैं अपने आप में तो महान जरुर बनूँ | इत्तेफाक से मुझे एक पीआर एजेंसी में काम करने का मौका मिला जिसका नाम पीआर प्रोफेसनल्स है |जिसका नाम मैंने पहले कभी नहीं सुना | जैसे ही इस फर्म से जुड़ा और पीआर का मतलब समझा तो मुझे यह एहसास हुआ की  शायद अब मेरे लिए जन्नत के दरवाजे खुल गये | जहाँ हर एक हुनर और कला का उपयोग किया जा सकता है | मुझे बहुत ही अच्छा प्लेटफार्म मिला है , जहाँ मैं हर एक चीज का आनंद लेता हूँ | जो मुझे बनना था उसकी तरफ धीरे-धीरे अग्रसर हो चला हूँ | 

मेरे विचार से, इन्सान के पास कितना भी पैसा क्यों न हो वह चाह कर भी लोंगों का प्यार, व्यवहार और इज्जत नहीं खरीद सकता, क्योंकी इज्जत बनाना पड़ता है और इज्जत बनाने के लिए पैसो को नहीं बल्कि अपने आप को लोंगों में निवेश करना पड़ता है, वो भी दिल से | पैसा बढ़ने पर इन्सान की खुशी कुछ पल के लिए होती है पर वहीँ इन्सान अगर अपने कार्य से लोंगों का दिल जीतता है, तो वह ख़ुशी न जाने कितने जन्मो तक ठहरती है | पैसा इन्सान की जरूरत है, इसकी अहमियत भी बहुत है | लेकिन उसके साथ अगर रिश्तों को, लोंगों के समर्थन को बरकरार रखा जाय, तो इन्सान अपने रिश्ते को और मजबूत बनाने की ओर अग्रसर होता है| जिसकी अहमियत भी बिल्कुल अलग है, जो खासकर आज के समय में बहुत मायने रखता है | जहाँ एक तरफ अच्छी चींजें खत्म हो रही हो और दूसरी तरफ कोई उसे बनाये रखने की कोशिश कर रहा हो, तो वाकई यह अपने आप में महान कार्य है | मै अपने आप को बहुत भाग्यशाली मानता हूँ, की मै इस पीआर फर्म में आया हूँ, जहाँ बस लगन और मेहनत की जरुरत है | मेरे लिए इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है, जिसे इतना अच्छा धरातल मिला हो | 

फसल का बीज चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो अगर उसका धरातल अच्छा न हो तो फसल कभी अच्छा नहीं हो सकता” |


-                                                        लेखक सदाम हुसेन - पीआर प्रोफेसनल्स 

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