Wednesday, 10 August 2016

कम्पनियों को गुणवत्ता के साथ-साथ पीआर भी जरुरी



आजकल देखा जाये तो कम्पनियां, कॉलेज, या संस्था भले ही अपनी तरफ से कितना भी बेस्ट क्यों न दे लेकिन कहीं न कहीं उन्हें भी लगता है की अच्छी गुणवत्ता देने के साथ साथ पीआर (Public Relations) भी जरुरी है | गुणवत्ता और पीआर दोनों अलग है और ये दोनों ऐसे पंख है जिनकी मदद से आसमान की सैर किया जा सकता है | पहले की तरह अब कुछ भी नहीं रहा अब सबकुछ बदल गया है, पहले की तुलना में आज समाज के लोंगों की सोच में भी काफी बदलाव आ गया है | अब संस्थाओं को मार्किट में आवश्यकता के अनुसार चलना पड़ता है |

पीआर क्यों जरुरी हो गया है ? ये समझना भी काफी दिलचस्प हो गया है ,और इसका एक मुख्य कारण है - मार्केट में कम्पटीशन | दिलचस्प बात तो यह है की आजकल सभी सेक्टरों में लोग नंबर वन बनना और बने रहना चाहते हैं | पहले के दौर में यह था की किसी आदमी को कोई चीज पसंद आती थी तो लोग उसे खुद  फैलाते थे की इस चीज की  गुणवत्ता काफी अच्छी है,  तो उस समय में ऐसे लोगों में वो चीजे फैलती थी | लेकिन आज उसी चीज का फैलाव अखबार, टीवी चैनलों, एफएम रेडियो, वेबसाइट पर छोटे-छोटे ऐड, स्पोंसरशिप करके, पब्लिक एप्रोच को निशाने बनाकर इत्यादि बहुत सारे माध्यम से एक ही झटके में वैश्विक स्तर पर किया जा रहा है| आज अगर कोई नई चीज लॉच करनी होती है तो लॉच करने से पहले ही लोगों में उसकी छवि नम्बर वन के रूप में बैठाई जाती है | नए-नए मार्केटिंग के तरीकों से पीआर किया जा रहा है |   

एक उदाहरण से यह स्पष्ट हो जायेगा की पीआर (Public Relations) क्यों बहुत जरुरी है | एक तरफ एक कम्पनी कोई नई चीज बेहद अच्छी गुणवत्ता के साथ बेच रही है , जिसे मार्केट में कोई जनता नहीं है और दूसरी तरफ एक और कम्पनी जो पहली वाली कम्पनी से थोडा कम गुणवत्ता की कोई चीज बेच रही है,  लेकिन इस कम्पनी को लगभग सारे लोग जानते हैं | ग्राहक कौन सी कम्पनी से सामन ख़रीदना चाहेगा ? इसमें कोई दो राय नहीं है, बिल्कुल ही वह दूसरी वाली कम्पनी से खरीदेगा | इस पंक्ति से साफ स्पष्ट है की पीआर क्यों जरुरी है |  

पहले के दौर में लोगों के पास समय का अभाव नहीं था तो लोगों से ही प्रचार-प्रसार हो जाता था | लेकिन आज के हाईटेक दौर में लोगों को बैठे-बैठे ही सारी चीजों की जानकारी मिल जा रही है | और उसका एक मात्र माध्यम है मिडिया, जिसके कारण यह सब कुछ सम्भव हो पाया है | मेरा यह मानना है की भले ही कम्पनियां, कॉलेज, या कोई संस्था गुणवत्ता दे रहा हो लेकिन उनकी छवि से जो पब्लिक रिलेशन बन रही है, एक नई सोच के साथ उसकी छवि जन में बैठ रही है उसका श्रेय मिडिया को जाता है, जो इनको हीरो ही नहीं बल्कि सुपर हीरो बना रही है |  


लेखक सदाम हुसेन पीआर प्रोफेसनल्स 

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