Thursday, 13 October 2016

बिहार के एक फ़रिश्ते ने दिखाई दरियादिली


उड़ी में हुए आतंकी  हमले पर गहरा शोक व्यक्त कर रहा हूँ | आज हम जिनकी वजह से अपने घरों में सुरक्षित है | मैं  उन्ही नौजवानों/रक्षकों/सैनिकों  को नम आखों से सलाम करता हूँ, जो आतंकी हमले में शहीद हो गए |

इन शहीद हुए नौजवानों को सरकार तो बस मुवावजा दे देती है और उसके बाद सब भूल जाते हैं | लेकिन क्या हम कभी सोचते है कि उनकी भी अपनी एक खुबसूरत दुनिया होती है, माँ, बाप, बीवी, बच्चें होते हैं | अगर यह खुबसूरत दुनियां उजड़ जाये तो पुरे परिवार की बदकिस्मती शुरू हो जाती है | शहीद होने के बदले में सिर्फ रुपयों की बरसात कर देने से उनकी आत्मा को शांति नहीं मिलती है | क्या हमारा फर्ज नहीं बनता की हम भी उन शहीद हुए नौजवानों के परिवार को तन-मन-धन से कुछ सहयोग करें ???  हम अनावश्यक रूप से बहुत पैसे खर्च करते है, लेकिन सही चीजों में खर्च करने की हमारी हैसियत ही नहीं | क्या हमने कभी यह सोचा की उन शहीदों के बच्चों का भविष्य क्या होगा?, कैसे जीवनयापन होगा? आगे कौन उनका सहारा होगा?

उनकी खुबसूरत दुनिया में कोहराम मच गया | सब कुछ खत्म हो गया| ये तमाम सवाल उन परिवार वालों के बारे में सोच कर महसूस कीजिये |
           
इन्ही सभी सवालों के जबाब बने एक ऐसे इंसान जो इन सब चीजों को खत्म होते नहीं देख सकते थे | और वो है गुड़गाँव स्थित पीआर प्रोफेशनल्स के संस्थापक एवं निदेशक श्री सर्वेश कुमार तिवारी, जिन्होंने उड़ी आतंकी हमले में शहीद सुनील कुमार विद्यार्थी के परिवार के दुःख में सम्मिलित होकर उनके बच्चों के भविष्य और परिवार के आर्थिक स्थिति को संभाला | शहीद विद्यार्थी  का परिवार बिहार के गया जिले के पौरैया अनुमंडल अंतर्गत बोकनारी गाँव में रहता है | उनकी तीन बेटियां और एक लड़का है, श्री तिवारी चारो बच्चों के स्नातक तक पढाई का खर्च और इस परिवार को प्रति साल दो लाख की आर्थिक सहायता की जिम्मेदारी उठाये और 22 सितम्बर 16 के दिन उनके घर जाकर परिवार को एक मुश्त बीस लाख का चेक भी सौपें |

हाल ही में श्री तिवारी नें मदर टरेसा के संस्थान मिशनरी ऑफ़ चैरिटी द्वारा संचालित दीपाश्रम गुड़गाँव के दिव्यांग बच्चों के पढाई और उनके दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए दो लाख की वार्षिक सहायता कर रहे है
इंसानियत क्या होती है , इसे श्री सर्वेश तिवारी से सीखें, जो हम लोंगों में से ही हैं | समाज के लिए इन्होनें अपना फर्ज एक फरिश्ते के रूप में निभाया है पूरी दुनिया को इन पर गर्व है | भविष्य में अगर कोई शहीद सुनील कुमार के बेटे आर्यन से पूछे की आर्यन तुम्हारा पापा कौन है तो आर्यन गर्व से कहेगा कि पापा का साया तो मेरे बचपन से उठ गया लेकिन अभी एक फ़रिश्ते(सर्वेश कुमार तिवारी) का साया जरुर है|

मै दुनिया को एक छोटा सा संदेश देना चाहूँगा की जहाँ एक तरफ बिहार के लोंगों का सर दुनिया के नजर में छोटे-छोटे गलत कार्यो से बदनाम हुआ है वहीँ दूसरी तरफ बिहार के ही श्री सर्वेश तिवारी जैसे फ़रिश्ते के इस नेक काम से बिहारवासियों का सिर बहुत ऊँचा उठा है|”    

जीवन में जख्म बड़े नहीं होते है, उनको भरने वाले बड़े होते है,
रिश्ते बड़े नहीं होते है, लेकिन रिश्तो को निभाने वाले बड़े होते है|”

लेखक सदाम हुसेन - PR Professionals

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