Monday, 17 October 2016

पब्लिक रिलेशन और आरओआई

प्रति दिन विभिन्न क्षेत्रों के महारथियों के सटीक बयान अखबाररेडियोटीवीबेबसाईट पर सैकडों की तादात में दिखाई देते हैं लेकिन इसके वाबजूद पब्लिक रिलेशन कंपनियों (Public Relations Companies) को लगातार एक सवाल बेहद तंग करता है कि एक बिजनेसमैन सीधे तौर पर अपनी हर प्रचारव्यावसायिक या पब्लिक रिलेशन गतिविधि को सीधे बिक्री या सेल्स से जोडकर देखता है। और पूरे विश्व में अभी भी किसी भी पब्लिक रिलेशन गतिविधि से कितनी बिक्री बढी है इसका आकलन करनी की प्रणाली नहीं बन सकी है। किंतु कोई भी बिजनेसमैन अपने सवाल का जवाब चाहता है उसको अपने रिसोर्सपीआर और इनवेस्टमेंट हर किसी का आरओआई यानि रिटर्न आन इनवेस्टमेंट की कैलकुलेशन समझनी है। जिससे वह अपनी भावी रणनीति तैयार कर सके।

अब इस समय में यह अत्यंत आवश्वक है कि विभिन्न औद्योगिक ईकाईयां न केवल मीडिया की पावर को समझें बल्कि एक सतत पब्लिक रिलेशन (Public Relations) गतिविधि से मिलने वाले फायदे को तात्कालिक आरओआई के बजाय लांगटर्म इनवेस्टमेंट समझकर चलें। जैसे एक बीज से फलदार वृक्ष बनने का सफर एक सही देखभाल और रखरखाव पर निर्भर करता है। ठीक उसी प्रकार ठीक ढंग से किए गए पीआर का असर थोडा लंबे समय के बाद नजर आता है। एक लंबी पीआर गतिविधि के लिए मीडिया में सक्रिय रहना बेहद जरूरी है।

भारत में पब्लिक रिलेशन (Public Relations)अभी भी शैशव काल में है। 90 प्रतिशत लोग पीआर को केवल प्रेस रिलीज या कमेंट छपाने की एक्सरसाईज मानकर बैठे हैं। लेकिन पब्लिक रिलेशन का दायरा इससे कहीं बडा है। विश्व भर में कई पीआर कैंपेन न केवल सफल हुए हैं बल्कि केस स्टडी बनकर इस क्षेत्र के लोगों के लिए मिसाल बन गए हैं। इनसे सबक और सीख लेकर पब्लिक रिलेशन के पैंतरों को थोडा बदलने की जरूरत शायद भारतीय कंपनियों को भी है तभी हम वैश्विक पटल पर इस क्षेत्र में भी अपनी साख कायम कर सकेंगे।

                        लेखक दुर्गेश त्रिपाठी PR Professionals 


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